Do Darshans of ShreeNathji Bhagwan peacefully with eyes open

Do Darshans of ShreeNathji Bhagwan peacefully with eyes open

श्रीनाथजी भगवान के दर्शन शांति पूर्वक, खुली आँख से करें


Shreenathji Thakurjee gives us Darshan eight times every day all through the year.@ Nathdwara Haveli


ठाकुरजी श्रीनाथजी उनके नाथद्वारा निज मंदिर से कई सकड़ों वर्षों से हमें दर्शन देने खड़े रहते हैं। हम अनेक जन्म चक्रों की प्रक्रिया से गुजर चुके हैं, परंतु श्रीजी ठाकुरजी बिना कोई शिकायत करे या हमें उनके श्रम का अहसास दिलाए, शांतिपूर्वक दिव्यता के साथ खड़े रहते हैं और दर्शन देने के अपने कर्म को पूर्ण करते हैं।और वह भी बिना किसी अवकाश और बिना अपनी दिनचर्या में किसी प्रकार का परिवर्तन किए हुए।

सोचिए हम कितने भाग्यशाली हैं, जब हम नाथद्वारा हवेली की ‘डोल्टी बारी’ (दर्शन कक्ष) में खड़े होकर, इतने करीब से ठाकुरजी के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त करते हैं।

जब हम उनके सन्मुख होते हैं, तो दर्शन का लाभ उठाते हुए, आँख खुली रख कर दर्शन यदि करें तो पूर्ण लाभ पा सकते हैं।

श्रीनाथजी को निरखते हुए उस दिव्य नटखट ऊर्जामान प्रतिमा को अपने भीतर समेट कर घर ले जाएँ। उस आनंदमय अनुभूति में खो जाएँ।

ना की आँख मूँद कर या तो कुछ जप करने लगे या फिर अपनी शिकायत या फरमाइश की सूची श्रीनाथजी को सुनाने लगें।

ऐसा करने से आप उस दिव्य धारा को चूक जाते हैं जो श्रीनाथजी की पूर्ण हाजिरी में दर्शन के दौरान बहती है।

किसी तरह के जाप, प्रार्थना, या श्रीजी से फरमाइश या शिकायत बाहर चौक में हो सकता है। श्रीजी की हवेली बहुत बड़ी है, और बहुत से चौक हैं, जहाँ आप शांति से घंटों बैठ कर जो चाहें कर सकते हैं।

यह एक मेरा भाव है, वैसे सभी वैष्णव को अधिकार है अपनी अपनी सोच का; प्रभु का आँगन हर तरह के भक्त के लिए हमेशा खुला रहता है।

गुरुश्री के सत्संग, और श्रीनाथजी की दिव्य संगति की छत्रछाया में, भाव शुद्धि की अहमियत और महत्व की महिमा को समझा है।


इसी भाव को लेकर जब हम चर्चा करते हैं, श्रीनाथजी प्रभु का आभास होता है, और उनके शब्द गूँजते हैं,

श्रीजी, ‘‘मेरे पास यहाँ (नाथद्वारा) में सोने (gold) का पलंग है, परंतु वहां पर कौन सोता है। हा हा हा। मैं तो यहाँ से भाग जाता हूँ।

पूरे दिन मुझे दर्शन देने के लिए खड़ा रखते हैं, लेकिन किसी में भाव तो है ही नहीं। कोई कभी यह नहीं महसूस करता कि श्रीजी को भी कभी अवकाश उपलब्ध होना चाहिए। तुम सब लोग विश्रामअवकाश पर जाते हो, क्या मुझे भी अवकाश का आनंद नहीं मिलना चाहिए?’’


हमारा प्रेम स्वीकार करें प्रभु श्रीजी!

मेरे महागुरुश्री, श्रीनाथजी की जय हो!



ShreeNathji has been here giving us His Loving Darshans year after year without any holiday or change in His routine. We may have gone through various birth cycles, but Shreeji -Thakurjee without complaining or letting us know if He may be tired; stands there without fail; completing His Karma of giving Darshans.


Shreeji,"I have a golden bed, (at Nathdwara) but who sleeps there? Entire day they make me stand, but nobody has any bhav any more. Nobody feels that Shreeji should also get a holiday.

All of you go on vacations, I also would like to enjoy a holiday”.



We Love You, Shreeji!

My MahaGurushree, ShreeNathji Ki Jai Ho!

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