ShreeNathji explains how all bhakts have their own Shreeji

“..अपने अपने श्रीजी की जय, अपने अपने श्रीजी की जय"; इस अनुभूति में श्रीनाथजी ने मुझे बहुत ही हँसाया..

कल रात (२६ मार्च २०१६) की बहुत ही दिव्य अनुभूति एक मधुर स्वप्न में, श्रीनाथजी के संग:

Last night’s (26 March 2016) divine dream experience with ShreeNathji


श्रीजी मुझे झँझोरते हैं, "चल जाग, मैं आया हूँ”.

आभा, "श्रीजी आइए, विराजिए”.

श्रीजी पूछते हैं, "क्या कर रही हो”.

मैं हँस कर जवाब देती हूँ, "श्रीजी अभी बस सो ही रही थी”.

श्रीजी, "मैं आज तुझे कुछ सुनाता हूँ, मेरे साथ जागेगी क्या”?

"आप आए हैं, मैं कुछ भी करूँगी, बताइए", मैंने जवाब दिया।

श्रीजी आज कुछ ज्यादा ही नटखट मूड में हैं, पुकारने लगते है उनकी मीठी और मधुर आवाज में.।

Shreeji wakes me up, “wake up I have come”

Abha, “Please come Shreeji, have a seat”

Shreeji inquires, “What are you doing”

I reply with a laugh, “Shreeji I was just asleep”

Shreeji, “I want to talk with you, will you stay awake with Me”

“You have come here Shreeji, I will do whatever You wish me to”, I reply.

Shreeji seems to be in an extra naughty mood today; begins to call out in His sweet sugary voice.


“गोवर्धननाथ की जय, राधा रानी की जय, कृष्ण कन्हैया की जय, अपने अपने श्रीजी की जय, अपने अपने श्रीजी की जय, अपने अपने श्रीजी की जय.."

मैंने उनको रोक कर पूछा, "श्रीजी आप ऐसे क्यों बोल रहे है, "अपने अपने श्रीजी की जय; श्रीजी अलग अलग तो नहीं होते, आप तो एक ही हैं”.

“Govardhan Nath ki jai, Radha Rani ki jai, Krishn Kanhaiya ki jai, Apne apne Shreeji ki jai, apne apne Shreeji ki jai’ apne apne Shreeji ki jai.”

Here I try to stop Him to ask, “Shreeji, why are You saying this, ‘Apne apne Shreeji ki jai’; Shreeji’s are not different, You are the only one”.


श्रीजी का जवाब सुन कर हँसते हँसते आँसूआ गए।

"मैंने सही पुकारा है। इतने सारे वैष्णव घर में मेरी सेवा करते है, किंतु सब भक्त अपनी अपनी सुविधा अनुसार जब जागते हैं, तब मंगला करते हैं।

कोई ५ बजे, कोई ५.३०, ६, ६.३०..; तो सब के श्रीजी अलग अलग हो गए ना! ठीक कहा मैंने?

इसलिए मैं पुकारता था, “अपने अपने श्रीजी की जय, अपने अपने श्रीजी की जय'; गलत कहाँ बोला मैंने"?

मैं ना जवाब हो जाती हूँ. क्या बोलू?

I laughed till tears flowed from my eyes when I heard Shreeji’s reply.

“I have called out correctly. There are innumerable vaishnsv who do My seva at their homes. All these bhakts do My Mangla whenever they wake up as per their convenience. Some at 5am, others at 5.30, 6.00, 6.30.., so everyone’s Shreeji is separate and different, isn't it”. Was I correct?”

“That is the reason I called out, “Apne apne Shreeji ki jai, apne apne Shreeji ki jai; am I wrong?”

I become speechless at the revelation. What is there to say?


ठाकुरजी आगे कहते हैं,

"नाथद्वारा में मेरे ८ समा के दर्शन नियम अनुसार होते हैं।

लेकिन यहाँ गोवर्धन पर हमने देखा है; सब दर्शन को एक में मिला देते हैं।

देखो ना, सुबह मंगला करते है, उस में ही बाकी दर्शन साथ कर देते हैं। मुझे उठा कर मटके भर भर कर पानी डालते हैं; मुझे सबके सामने ही स्नान करा देते है!

फिर दूध के मटके भर के मेरे ऊपर डालते हैं।

भाव कहाँ है?

वस्त्र भी पहना दिए, तिलक, श्रिंगार भी हो गया, भोग भी दे दिया! आरती भी कर देते है. सब एक ही बार में, शयन तक के लिए।

इतना सारा भोजन कराते हैं, मैं कैसे आरोग सकता हूँ? कितना छोटा सा हूँ मैं।

आरती हो जाती है, फिर तो मुझे वैष्णव के लिए छोड़ देते हैं। इतने लोग मेरे ऊपर एक साथ आते है, मैं घबरा कर वहाँ से भाग जाता हूँ।

सब एक दूसरे की देखा देखी दूध और जल फिर से चढ़ाते हैं।

अरे! अभी तो मुझे स्नान कराया था, क्या पूरे दिन स्नान ही करता रहूँ?

मुझे समझ नहीं आता की क्या हो रहा है, इस लिए यहाँ से चुपचाप निकल जाता हूँ।

ये पंडे लोग तो इसी में लगे रहते हैं, की हमारी परात में कितना रुपया आया।

तुम सोचो जरा, मेरे ऊपर कितने लोग एक साथ टूट पड़ते है”।

Thakurjee speaks further,

“At Nathdwara My eight sama darshans are held with proper discipline.

But here at Govardhan We always see, they combine all darshans in one. See for yourself, they complete Mangla in the morning, and include rest of the darshans in this only. I am woken up and a bucket full of water is thrown on My Face. These people bathe Me in front of all the people only. After this they throw buckets of milk on Me. Where is bhao in this?

They offered Me vastra, did My tilak, completed shringar, and placed bhog in front of Me also. They complete Aarti also. All this process is done together at the same time only. I am offered so much food, how can I take it all at one time? Cant they see how small I am?

Once the aarti is over, immediately they leave Me for the vaishnavs. Hundreds of people just jump on Me; I get very nervous and have to run away from there.

Every one flows milk on Me because they see others doing the same. And then put water on Me.

Arrey! Just few moments ago you all had bathed Me, should I continue to bathe the whole day?

I just do not understand what is happening, so quietly I just leave from there.

The pundas are only interested to count how much rupees have collected in their tray.

Can you even count the number of people who jump on Me”?


मैंने यह बात कबूल करी, "हाँ श्रीजी मेरे पास तो विडीओ भी है, की कैसे आरती होते ही आप पर लोग टूट पड़ते है, कोई सोचता नहीं कि आपको तकलीफ होती होगी। यहाँ पर जो पंडे हैं वे ही इस बात की अनुमति देते हैं”।

श्रीजी फिर अपने नटखट मूड में आ जाते हैं, "इसलिए पुकार रहा था, 'अपने अपने श्रीजी की जय, अपने अपने श्रीजी की जय'; समझ में आया की नहीं?

"जिसका जो मन होता है वो उस तरह से मेरी सेवा करता है; तो सबके श्रीजी अलग अलग हो गए; क्योंकि सबके भाव अलग अलग हो गए. समझ में आया की नहीं बुद्धू ?

अच्छा आभा शाहरा, अब मैं चलता हूँ बहुत सारा काम है। Bye bye”.

I have to agree to this, “You are correct Shreeji, I have videos also, about how as soon as the aarti is complete people are given permission to crowd over You, None of them stop to think that It may cause shram to Shreeji. It is the pundas in charge, that allow the people to jump over You”. I feel sad at this but as suddenly Shreeji changes to His earlier naughty mood, “That is why I was calling out ‘apne Shreeji ki jai’ apne apne Shreeji ki jai. Do you understand now”?

“Whatever type of bhao they have all do seva accordingly. So each one has a different Shreeji, isn't it. Do you now understand stupid;

Okay Abha Shahra, I have to leave now, there is a lot of work to complete. Bye bye”.


आँख खुल जाती है, ऐसा लगता है श्रीजी मेरे सर पर बहुत दुलार से हाथ फेर कर भाग गए..

उठ कर स्नान करती हूँ और ठाकुरजी को धूप अर्पण करती हूँ; लेकिन फिर नींद कहाँ आती है!

My eyes open, It feels as if Shreeji has blessed me on my head with His soft touch and run away. I get out of bed, go for shower, and offer dhoop to ShreeNathji. There is no longer sleep in my eyes.


इसी मधुर अनुभूति में खो कर पूर्ण अनुभव लिखने की कोशिश करती है।

किंतु जो माधुर्य का अनुभव श्रीजी की मीठी वाणी सुनकर हुआ, वो शब्दों में लाना नामुमकिन है.

I drown in the sweetness of this anubhuti, and write it down in my diary.

But of course, the sweetness of the divine experience that comes with the sweet voice of ShreeNathji can never be captured in words.


गुरुश्री को प्रणाम,

जय हो ‘मेरे श्रीजी’ की!

आभा शाहरा श्यामा




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