ShreeNathji re confirms that I am His best friend on friendship day

“..उन सबको बोल दिया की तुम सब के सब फ़ेस्बुक फ़्रेंड बन जाओ, हा हा हा.."



Friendship day today on the 7.8.2016

आज दोपहर से गुरुश्री और मैं श्रीनाथजी के साथ बरसाना में हैं, राधा रानी के मंदिर में। वृंदावन पहुँचने में समय लग जाएगा, इसलिए हम गोवर्धन पर ही भोजन के लिए रुक जाते हैं। हम भोजन कर रहे हैं, तभी श्रीनाथजी उनके जतीपुरा मुखारविंद पर भाग जाते हैं; और वहीं से गुरुश्री को आज्ञा करते हैं, “भोजन पूरा होते ही मेरे से मिलने यहाँ आओ”।

हम जल्दी भोजन पूरा करके मुखारविंद आ जाते हैं। रात अधिक होने से ज़्यादा भीड़ नहीं है। कुछ फ़ोटो लेते हैं।

Gurushree and I are at Barsana today with ShreeNathji from afternoon onwards.

It's late, so on our way back from Barsana, we stop at Giriraj Govardhan for dinner. While we finish our dinner, Shreeji runs to His Mukharvind on Girirajji.

From here He orders Gurushree, “Come and meet Me when you’ll complete dinner”.

So we quickly finish dinner and go for darshans at ShreeNathji Mukharwind.

Being late it's not very crowded. We take a few pictures.

श्रीजी, "मैंने तुम को यहाँ बुलाया क्योंकि मुझे मालूम है की आज फ़्रेंड्शिप डे है; और तू मेरी बेस्ट फ़्रेंड है।

तो फिर आज का दर्शन तो तुझे देना चाहिए। इसलिए सुधीर को बोला की तुम लोग भोजन करके मेरे पास आओ।

इस फ़ोटो में देख कौन कौन दिखता है. फ़्रेंड्शिप डे का गिफ़्ट है मेरी बेस्ट फ़्रेंड के लिए”।

Shreeji, “I have called you’ll here as I know it is friendship day today. And you are My best friend!

So today I should grant you some darshans. Because of this I told Sudhir to come here. Take a look at the photos that you have, you all are visible in them? It is a friendship day gift for My best friend today.

“इसको पोस्ट ज़रूर करना।

सबको बताना की श्रीनाथजी ने अपनी "ओन्ली बेस्ट फ़्रेंड" को गिफ़्ट दिया है”।

इसके बाद जैसे की श्रीजी की आदत है मज़ाक़ करने की, वे कहते हैं, "लेकिन फिर बाक़ी की भक्त कहेंगे की हमारा क्या? हमें भी फ़्रेंड बनाइए। उन सबको बोल दिया की तुम सब के सब फ़ेस्बुक फ़्रेंड बन जाओ, हा हा हा.."

“Do post this happening. You should let all know that ShreeNathji has given a gift to His “Only best friend”.

And after this as is ShreeNathji’s habit, He makes a joke out of it, “When you tell everyone about this then all bhakts will want to become My friend also. But I will tell all of them to go and become Facebook friends..ha, ha, ha..”

श्रीनाथजी ठाकुरजी के जय हो! बहुत बहुत विनम्र नतमस्तक हूँ, इस उच्च सम्मान के लिए मैं क्या कहूँ..

Jai Ho Thakurjee, ShreeNathji, Shree GovardhanNathji;

Thank you again and again for giving me this honour.


I pray and hope, I shall always be able to keep up to the love and trust that You bestowed in me.

Humble bhakt

Abha Shahra Shyama.


Dhanyawad.

My pranam to my Gurushree Sudhir Shah.

Thank you for everything.



Darshans at Mukharvind on Friendship day, 7.8.2016


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